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१० अगस्त १९८५ को, [[Special:MyLanguage/Inner Retreat|आंतरिक आश्रय स्थल]] (Inner Retreat) में स्वाधीनता की देवी ने दिव्य वाणी में कहा था: | १० अगस्त १९८५ को, [[Special:MyLanguage/Inner Retreat|आंतरिक आश्रय स्थल]] (Inner Retreat) में स्वाधीनता की देवी ने दिव्य वाणी में कहा था: | ||
मैं [[Special:MyLanguage/Lanello|लैनेलो]] के दिल की खुशी से विदा लेती हूँ लेकिन मैं अपनी अपने ज्ञान की मशाल गुरु माँ के पास तुम्हारे लिए छोड़ कर जाती हूँ। यह मशाल एक आकाशीय उपस्थिति (Electronic Presence) के रूप में तब तक यहाँ रहेगी जब तक शिष्य मेरी प्रतिमा पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे। मेरी प्रतिमा पर ध्यान केंद्रित करना | मैं [[Special:MyLanguage/Lanello|लैनेलो]] के दिल की खुशी से विदा लेती हूँ लेकिन मैं अपनी अपने ज्ञान की मशाल गुरु माँ के पास तुम्हारे लिए छोड़ कर जाती हूँ। यह मशाल एक आकाशीय उपस्थिति (Electronic Presence) के रूप में तब तक यहाँ रहेगी जब तक शिष्य मेरी प्रतिमा पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे। मेरी प्रतिमा पर ध्यान केंद्रित करना मेरी ज्ञान की मशाल को ऊँचा उठा के रखना और शिष्यों की इच्छा को दर्शाता है। ऐसा तब तक होगा जब तक कि विश्व माँ का मिशन पूरा न हो जाए और पृथ्वी के सब लोग जो इस प्रकाश रुपी उपहार में बुलाए गए हैं, घर वापस न आ जाएँ <ref>स्वतंत्रता की देवी, "आवर ओरिजिन इन द हार्ट ऑफ़ लिबर्टी," {{POWref|२८|४५|, १० नवंबर, १९८५}}</ref></blockquote> | ||
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