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Maha Chohan/hi: Difference between revisions

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उस जन्म के बारे में बात करते हुए महा चौहान कहते हैं
उस जन्म के बारे में बात करते हुए महा चौहान कहते हैं


<blockquote>मैं कई जन्मों चरवाहा था, तब मैं पहाड़ियों पर भेड़ों की देखभाल करता था और साथ ही भगवान से ज्ञान की प्रार्थना भी करता था ताकि उस ज्ञान को मैं अन्य लोगों को बता सकूं जो मेरे आस पास थे, जिनकी ज़िम्मेदारी ईश्वर ने मुझे दी थी। और इन सब के बीच देवदूत कई बार मुझे आकाशीय स्तर पर स्थित आत्मा की अकादमियों में ले गए जहाँ पर महा चौहान के सरंक्षण में मैंने बहुत कुछ सीखा और स्वयं को पवित्र आत्मा का आवरण पहनने के योग्य बनाया।<ref>महा चौहान, "मैं पवित्र अग्नि की अदालत के समक्ष  ईश्वर के सभी अनुयायियों के ज्ञानवर्धन की प्रार्थना करता हूँ।"{{POWref|३८|३३|, जुलाई ३०, १९९५}}</ref></blockquote>
<blockquote>मैं कई जन्मों चरवाहा था, तब मैं पहाड़ियों पर भेड़ों की देखभाल करता था और साथ ही भगवान से ज्ञान की प्रार्थना भी करता था ताकि उस ज्ञान को मैं अन्य लोगों को बता सकूं जो मेरे आस पास थे, जिनकी ज़िम्मेदारी ईश्वर ने मुझे दी थी। और इन सब के बीच देवदूत कई बार मुझे आकाशीय स्तर पर स्थित आत्मा की अकादमियों (academies) में ले गए जहाँ पर महा चौहान के सरंक्षण में मैंने बहुत कुछ सीखा और स्वयं को पवित्र आत्मा का आवरण पहनने के योग्य बनाया।<ref>महा चौहान, "मैं पवित्र अग्नि की अदालत के समक्ष  ईश्वर के सभी अनुयायियों के ज्ञानवर्धन की प्रार्थना करता हूँ।"{{POWref|३८|३३|, जुलाई ३०, १९९५}}</ref></blockquote>


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