7,122
edits
(Created page with "<blockquote> मैं ईश्वर का क्रियात्मक रूप हूँ। आज मैं आपके पास अप्रवासन के विषय में अद्भुत विचार - कार्यों में कृतज्ञता का भाव - प्रकट करने के लिए आया हूँ।आप इस बात को जान लीजिये कि हमारा इरादा...") |
(Created page with "ईश्वर के हृदय से इस अनमोल पृथ्वी पर आना एक सुनहरा अवसर है। और ईश्वर के हृदय में वापस जाना भी एक सुन्दर अवसर है। इसलिए मनुष्यों को कृतज्ञता के इस वरदान को स्वीकार करना चाहिए - "सदा कृतज्...") |
||
| Line 76: | Line 76: | ||
मैं ईश्वर का क्रियात्मक रूप हूँ। आज मैं आपके पास अप्रवासन के विषय में अद्भुत विचार - कार्यों में कृतज्ञता का भाव - प्रकट करने के लिए आया हूँ।आप इस बात को जान लीजिये कि हमारा इरादा अमेरिका को एक ऐसा देश बनाने का था जहां के लोग सदा कृतज्ञता के साथ कार्य करें जिसके फलस्वरूप उनमें स्वतंत्रता का वह अद्भुत रवैया पैदा हो जो लोगों को उनके स्वयं के दिल में रहनेवाले ईश्वर के प्रति उत्तरदायी बनाये। | मैं ईश्वर का क्रियात्मक रूप हूँ। आज मैं आपके पास अप्रवासन के विषय में अद्भुत विचार - कार्यों में कृतज्ञता का भाव - प्रकट करने के लिए आया हूँ।आप इस बात को जान लीजिये कि हमारा इरादा अमेरिका को एक ऐसा देश बनाने का था जहां के लोग सदा कृतज्ञता के साथ कार्य करें जिसके फलस्वरूप उनमें स्वतंत्रता का वह अद्भुत रवैया पैदा हो जो लोगों को उनके स्वयं के दिल में रहनेवाले ईश्वर के प्रति उत्तरदायी बनाये। | ||
ईश्वर के हृदय से इस अनमोल पृथ्वी पर आना एक सुनहरा अवसर है। और ईश्वर के हृदय में वापस जाना भी एक सुन्दर अवसर है। इसलिए मनुष्यों को कृतज्ञता के इस वरदान को स्वीकार करना चाहिए - "सदा कृतज्ञता के भाव में रहना चाहिए!" मानव जाति को हमेशा ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।<ref>स्वतंत्रता की देवी, ''लिबर्टी प्रोक्लेम्स'' (१९७५), पृष्ठ १३, १५- १६.</ref> | |||
Although she has attained initiations at cosmic levels and need not remain with the planet, the Goddess of Liberty has taken the vow to remain in the service of the earth until every last man, woman and child has made his ascension. This is the [[bodhisattva]] ideal. | Although she has attained initiations at cosmic levels and need not remain with the planet, the Goddess of Liberty has taken the vow to remain in the service of the earth until every last man, woman and child has made his ascension. This is the [[bodhisattva]] ideal. | ||
edits