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(१) ईश्वर की स्वयं के बारे में जानकारी कि वह ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा भी है तथा संपूर्ण ब्रह्माण्ड भी। | (१) ईश्वर की स्वयं के बारे में जानकारी कि वह ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा भी है तथा संपूर्ण ब्रह्माण्ड भी। | ||
(२) मनुष्य की स्वयं के बारे में जागरूकता, वह कैसे रहता है, किस प्रकार का व्यवहार करता है, और स्वयं को किस प्रकार से ब्रह्मांडीय आत्म-जागरूकता और उच्च चेतना के क्षेत्र में चारों ओर से घिरा हुआ पाता है। वह मनुष्य स्वयं को आत्म-जागरूकता के द्वारा आत्म-साक्षात्कार के योग्य पाता है। उसमे ब्रह्मांडीय | (२) मनुष्य की स्वयं के बारे में जागरूकता, वह कैसे रहता है, किस प्रकार का व्यवहार करता है, और स्वयं को किस प्रकार से ब्रह्मांडीय आत्म-जागरूकता और उच्च चेतना के क्षेत्र में चारों ओर से घिरा हुआ पाता है। वह मनुष्य स्वयं को आत्म-जागरूकता के द्वारा आत्म-साक्षात्कार के योग्य पाता है। उसमे ब्रह्मांडीय चक्रों (cycles) की निपुणता, ब्रह्मांडीय आयामों में ईश्वरीय अंश के रूप में सहजशीलता, [[Special:MyLanguage/Cosmic Christ|ब्रह्मांडीय चेतना]] के माध्यम से दीक्षा की प्राप्ति के गुण उसके साक्षी होते हैं। | ||
चक्रों (cycles) की निपुणता, ब्रह्मांडीय आयामों में ईश्वरीय अंश के रूप में सहजशीलता, [[Special:MyLanguage/Cosmic Christ|ब्रह्मांडीय चेतना]] के माध्यम से दीक्षा की प्राप्ति के गुण उसके साक्षी होते हैं। | |||
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