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जब कोई जीवात्मा शारीरिक मृत्यु के बाद पृथ्वी पर किये गए अपने कर्मों का हिसाब-किताब देने के लिए कार्मिक समिति के सामने आती है तो कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत या उसके प्रतिनिधियों में से एक कर्मों के स्वामी उस मनुष्य की [[Special:MyLanguage/Book of Life|जीवन की पुस्तक]] (Book of Life) के अभिलेख पढ़ते हैं। कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत उन जीवनधाराओं के अभिलेख भी पढ़ते हैं जो [[Special:MyLanguage/Sirius|सीरियस]] (Sirius) पर [[Special:MyLanguage/Court of the Sacred Fire|पवित्र अग्नि के न्यायालय]] (Court of the Sacred Fire) में [[Special:MyLanguage/Last Judgment|अंतिम निर्णय]] (Last Judgment) के लिए आते हैं। इस समय केवल उन्हें ही सर्वशक्तिमान ईश्वर के सामने खड़े होने की अनुमति मिलती है। | जब कोई जीवात्मा शारीरिक मृत्यु के बाद पृथ्वी पर किये गए अपने कर्मों का हिसाब-किताब देने के लिए कार्मिक समिति के सामने आती है तो कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत या उसके प्रतिनिधियों में से एक कर्मों के स्वामी उस मनुष्य की [[Special:MyLanguage/Book of Life|जीवन की पुस्तक]] (Book of Life) के अभिलेख पढ़ते हैं। कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत उन जीवनधाराओं के अभिलेख भी पढ़ते हैं जो [[Special:MyLanguage/Sirius|सीरियस]] (Sirius) पर [[Special:MyLanguage/Court of the Sacred Fire|पवित्र अग्नि के न्यायालय]] (Court of the Sacred Fire) में [[Special:MyLanguage/Last Judgment|अंतिम निर्णय]] (Last Judgment) के लिए आते हैं। इस समय केवल उन्हें ही सर्वशक्तिमान ईश्वर के सामने खड़े होने की अनुमति मिलती है। | ||
जब पृथ्वी पर जन्म-मृत्यु का चक्र समाप्त होता है और आत्मा की [[Special:MyLanguage/ascension|मोक्ष प्राप्ति]] (ascension) करने का समय आता है, तो कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत या उनके सहायकों में से एक | जब पृथ्वी पर जन्म-मृत्यु का चक्र समाप्त होता है और जीव-आत्मा की [[Special:MyLanguage/ascension|मोक्ष प्राप्ति]] (ascension) करने का समय आता है, तो कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत या उनके सहायकों में से एक उस जीव-आत्मा की उपलब्धि के सम्मान में उस जीवनधारा के सारे अभिलेख पढ़ते हैं। कर्मों को सूची पत्र में लिखने वाले देवदूत उस जीवात्मा के [[Special:MyLanguage/Christ Self|ईश्वरीय स्वरुप]] के साथ मिलकर ये सभी अभिलेख - जिन्होंने जीव-आत्मा को पृथ्वी से बांध रखा होता है - अग्नि के सुपुर्द कर देते हैं । इसके बाद वे कहते हैं, “ईश्वर के शाश्वत अभिलेखों में केवल शाश्वत पूर्णता का अभिलेख ही रहेगा।"<ref>Ibid</ref> | ||
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