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Lord of the World/hi: Difference between revisions

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१ (1) जनवरी, १९५६ (1956) को जब गौतम बुद्ध ने विश्व के स्वामी का पद भार संभाला तब उन्होंने अपने ह्रदय की लौ के माध्यम से पृथ्वी पर जीवन बनाये रखने की ज़िम्मेदारी भी ली। और तब सनत कुमार ने वापिस अपना 'विश्व के शासक भगवन' (Regent Lord of the World) का पद ग्रहण किया और  अपने ग्रह शुक्र पर लौट गए। पृथ्वी से लौट जाने के बावजूद सनत कुमार आज भी यहां पृथ्वी पर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) की सेवाओं में युक्त हैं।  
१ (1) जनवरी, १९५६ (1956) को जब गौतम बुद्ध ने विश्व के स्वामी का पद भार संभाला तब उन्होंने अपने ह्रदय की लौ के माध्यम से पृथ्वी पर जीवन बनाये रखने की ज़िम्मेदारी भी ली। और तब सनत कुमार ने वापिस अपना 'विश्व के शासक भगवन' (Regent Lord of the World) का पद ग्रहण किया और  अपने ग्रह शुक्र पर लौट गए। पृथ्वी से लौट जाने के बावजूद सनत कुमार आज भी यहां पृथ्वी पर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) की सेवाओं में युक्त हैं।  


गौतम के पुराने कार्यालय (कॉस्मिक क्राइस्ट एंड प्लेनेटरी बुद्ध) (Cosmic Christ and Planetary Buddha) को मैत्रेय बुद्ध ने संभाल लिया तथा मैत्रेय बुद्ध के पुराने कार्यालय [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] को [[Special:MyLanguage/Jesus|जीसस]] और उनके प्रिय मित्र एवं शिष्य [[Special:MyLanguage/Saint Francis|सेंट फ्रांसिस]] ([[Special:MyLanguage/Kuthumi|कुथुमी]]) ने संभाल लिया। यह सारा समारोह [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] (Royal Teton Retreat) में हुआ था। [[Special:MyLanguage/Lord Lanto|लॉर्ड लांटो]] (Lord Lanto) ने दूसरी किरण के चौहान का पद १९५८ में ग्रहण किया; यह पद पहले कुथुमी के पास था। इसी समय [[Special:MyLanguage/Nada|नाडा]] (Nada) ने छठी किरण के चौहान का पद ग्रहण किया, जो कि पहले के युग (मीन युग) में ईसा मसीह
गौतम के पुराने कार्यालय (कॉस्मिक क्राइस्ट एंड प्लेनेटरी बुद्ध) (Cosmic Christ and Planetary Buddha) को मैत्रेय बुद्ध ने संभाल लिया तथा मैत्रेय बुद्ध के पुराने कार्यालय [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) को [[Special:MyLanguage/Jesus|जीसस]] और उनके प्रिय मित्र एवं शिष्य [[Special:MyLanguage/Saint Francis|सेंट फ्रांसिस]] (Saint Francis) ([[Special:MyLanguage/Kuthumi|कुथुमी]]) ने संभाल लिया। यह सारा समारोह [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] (Royal Teton Retreat) में हुआ था। [[Special:MyLanguage/Lord Lanto|लॉर्ड लांटो]] (Lord Lanto) ने दूसरी किरण के चौहान का पद जुलाई १९५८ (1958) में ग्रहण किया; यह पद पहले कुथुमी के पास था। इसी समय [[Special:MyLanguage/Nada|नाडा]] (Nada) ने छठी किरण के चौहान का पद ग्रहण किया, जो कि पहले के युग (मीन युग) में ईसा मसीह
(Jesus) के पास था। ईसा मसीह मीन युग के अधिपति भी थे।  
(Jesus) के पास था। ईसा मसीह मीन युग के अधिपति भी थे।  


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