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दिव्य आत्माएं, सबसे पहलेवाले, ईश्वर द्वारा भेजे गए दूत हैं जिन्हे ईश्वर ने मनुष्यों को अपना सन्देश देने के लिए भेजा है। ये ऐसी शासकीय आत्माएं जिनको ईश्वर ने [[Special:MyLanguage/Jesus Christ|ईसा मसीह]] के उत्तराधिकारियों (मनुष्यों) को आराम पहुंचाने, रक्षा करने, मार्गदर्शन करने, मज़बूत बनाने, शिक्षा देने, परामर्श देने और सचेत करने भेजा है। ये प्रकाश के संगी-साथी हैं जो पूरे [[Special:MyLanguage/cosmos|ब्रह्माण्ड]] में ईश्वर के बच्चों की सेवा के लिए सदा तत्पर रहते हैं। ये ईश्वर की चेतना से उत्पन्न हुए, स्वयं ईश्वर के द्वारा रचे हुए प्राणी हैं जो पृथ्वी पर मनुष्यों की मदद करने के लिए हैं। देवदूतों के बारे में ईश्वर कहते हैं, "वह अपने दूतों की आत्माओं, अपने सेवकों को पवित्र अग्नि की ज्वाला बनाता है।" | दिव्य आत्माएं, सबसे पहलेवाले, ईश्वर द्वारा भेजे गए दूत हैं जिन्हे ईश्वर ने मनुष्यों को अपना सन्देश देने के लिए भेजा है। ये ऐसी शासकीय आत्माएं जिनको ईश्वर ने [[Special:MyLanguage/Jesus Christ|ईसा मसीह]] के उत्तराधिकारियों (मनुष्यों) को आराम पहुंचाने, रक्षा करने, मार्गदर्शन करने, मज़बूत बनाने, शिक्षा देने, परामर्श देने और सचेत करने भेजा है। ये प्रकाश के संगी-साथी हैं जो पूरे [[Special:MyLanguage/cosmos|ब्रह्माण्ड]] में ईश्वर के बच्चों की सेवा के लिए सदा तत्पर रहते हैं। ये ईश्वर की चेतना से उत्पन्न हुए, स्वयं ईश्वर के द्वारा रचे हुए प्राणी हैं जो पृथ्वी पर मनुष्यों की मदद करने के लिए हैं। देवदूतों के बारे में ईश्वर कहते हैं, "वह अपने दूतों की आत्माओं, अपने सेवकों को पवित्र अग्नि की ज्वाला बनाता है।" | ||
ये दिव्य मेज़बान मनुष्यों से अलग प्रजाति के होते हैं और पूर्ण रूप से ईश्वर तथा अपने क्रम के [[Special:MyLanguage/archangels|महादेवदूत]] के प्रति समर्पित होते हैं। इनका काम ईश्वर द्वारा रचित सृष्टि में ईश्वरीय गुणों को तेज़ गति से केंद्रित करना तथा उनका विस्तार करना है। ये मनुष्यों के आभामंडल को प्रकाशित कर उनके ह्रदय में सकारात्मक विचारों जैसे आशा, विश्वास, परोपकार, गौरव, समग्रता, साहस, सत्यनिष्ठा, स्वाधीनता, कृपा, और न्याय इत्यादि का | |||
संचार करते है। | |||
Because of the blessedness of their unseen presence, the author of Hebrews said, “Be not forgetful to entertain strangers: for thereby some have entertained angels unawares”<ref>Heb. 13:2.</ref>—and in so saying made a point for the case that angels do take embodiment and move among us as our best friends and helpers, even when total strangers. | Because of the blessedness of their unseen presence, the author of Hebrews said, “Be not forgetful to entertain strangers: for thereby some have entertained angels unawares”<ref>Heb. 13:2.</ref>—and in so saying made a point for the case that angels do take embodiment and move among us as our best friends and helpers, even when total strangers. | ||
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