7,190
edits
(Created page with "पतित दिव्यदूत ") |
No edit summary |
||
| Line 8: | Line 8: | ||
संचार करते है। | संचार करते है। | ||
देवदूत अदृश्य रहते हुए भी जिस प्रकार से हम मनुष्यों की सहायता करते हैं, उसे संज्ञान में लेते हुए 'हिब्रू' (Hebrew) के लेखक ने कहा है, "कभी भी अनजान लोगों का सत्कार करने से मत चूकियेगा क्योंकि देवदूत अक्सर अनजान रूप में ही हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं।<ref>Heb. 13:2.</ref>—ऐसा कहकर उन्होंने यह बात बताने की कोशिश की है कि दिव्यदूत हमारी मदद के लिए प्रायः मनुष्य रूप लेते हैं, वे हमारे बीच कभी दोस्त तो कभी सहायक बनकर रहते हैं। | |||
प्रतीकात्मक रूप में कहें तो ये मानिये की | प्रतीकात्मक रूप में कहें तो ये मानिये की देवदूत हमारे आस-पास ऐसे रहते हैं जैसे सूर्य के चारों ओर अणु (इलेक्ट्रान) घुमते हैं - ये वो अणु हैं जिन्होंने ईश्वर की इच्छानुसार लोगों के मन में चेतना जागृत करने का काम अपने ज़िम्मे लिया है। दिव्यदूत [[Special:MyLanguage/Great Central Sun|ग्रेट सेंट्रल सन]] की ऊर्जा, प्रकाश एवं चेतना से परिपूर्ण कण हैं। ये ईश्वर की तेजस्वी उपस्थिति के स्तंभ हैं जो एक तरह से स्टेप-डाउन ट्रांसफार्मर्स (step-down transformers) के सामान हैं जो ईश्वर के अप्रतिम ऊर्जा एवं प्रकाश को इंसानों तक तब पहुंचाते हैं जब वे कर्मफल भोगते हुए अत्यंत कठिन समय से गुज़र रहे होते हैं। | ||
देवदूत कोई भी रूप ले सकते हैं - कभी वे मनुष्य रूप धारण करते हैं तो कभी वे ऊर्जा के एक ऐसे केंद्र केंद्र का रूप ले लेते हैं जो आवश्यकता के समय आसानी से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर सके सके सके। दिव्यदूत कई प्रकार के हैं - कुछ का कार्य उपचार करना है, कुछ का रक्षा; कुछ प्रेम करना सिखाते हैं तो कुछ धैर्य और करुणा; कुछ दिव्यदूत जीवन और मरण के चक्र पर कार्यरत हैं तो कुछ ईश्वर के वह नेत्र जिनसे कुछ छुपा हुआ नहीं है, जो सत्य की प्रतिमूर्ति हैं तथा सदा सत्य की [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] लेकर चलते हैं जिससे वे सत्य-असत्य में भेद कर पाएं। देवदूत को उनके कार्यों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। कुछ देवदूत ऐसे भी हैं जो ब्रह्मांडीय पदानुक्रम के कुछ विशिष्ट कार्य करते हैं - [[Special:MyLanguage/seraphim|सेराफिम]], [[Special:MyLanguage/cherubim|शीरूबिंम]], और वो [[Special:MyLanguage/angel|दिव्यदूत]] जो प्रकृति के साथ कार्य करते हैं अथवा अग्नि, वायु, जल और भूमि [[Special:MyLanguage/elemental|तत्वों]] के साथ सलंग्न हैं। | |||
अपने अनंत स्नेह के प्रतीक स्वरुप ईश्वर ने | अपने अनंत स्नेह के प्रतीक स्वरुप ईश्वर ने देवदूतों को पदानुक्रम में ऊपर उठने के [[Special:MyLanguage/initiation|मार्ग]] दिए हैं। शताब्दियों तक विधाता के लिए निष्ठा और उसके द्वारा रचित सृष्टि की भक्ति करने के फलस्वरूप, देवदूतों को उपहार के रूप में स्वेच्छा से कार्य करने का तथा जन्म लेने का अधिकार दिया जा सकता है। ऐसा होने पर देवदूत देवताओं के साम्राज्य में विकास कर सकते हैं पर ऐसा तभी हो सकता है जब वे मनुष्यों की तरह इम्तिहानो का सामना कर उनमे उत्तीर्ण हों; ऐसे स्तिथि में देवदूतों पर भी कर्म के सिद्धांत लागू होते हैं। जब वे इन सभी अपेक्षित मानकों पर खरे उतरते हैं तो देवदूत भी [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] के पथ से गुज़रते हुए महादेवदूत बन सकते हैं। | ||
== See also == | == See also == | ||
| Line 20: | Line 20: | ||
[[Special:MyLanguage/archangel|महादेवदूत]] | [[Special:MyLanguage/archangel|महादेवदूत]] | ||
[[Special:MyLanguage/fallen angels|पतित | [[Special:MyLanguage/fallen angels|पतित देवदूत]] | ||
[[Special:MyLanguage/three kingdoms|तीन साम्राज्य]] | [[Special:MyLanguage/three kingdoms|तीन साम्राज्य]] | ||
| Line 26: | Line 26: | ||
[[:Category:Heavenly beings|List of ascended masters, cosmic beings and angels]] | [[:Category:Heavenly beings|List of ascended masters, cosmic beings and angels]] | ||
== | <span id="Sources"></span> | ||
== स्रोत == | |||
{{SGA}}. | {{SGA}}. | ||
edits