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(Created page with "जिस प्रकार हवा के मौलिक तत्व स्लिफ्स(slyphs) अग्नि के मौलिक तत्व सालामेंडर्स(Salamanders) पृथ्वी के मौलिक तत्व नोमस(Gnomes) और जल के मौलिक तत्व अनडाइंस(U...") Tags: Mobile edit Mobile web edit |
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चाहे मनुष्य शरीर के मौलिक तत्व की उपस्थिति को जाने या न जाने; माने या न माने, मौलिक तत्व सदैव मनुष्य की सेवा में लगा रहता है, वह मनुष्य की इच्छानुसार कार्य करता रहता है। मनुष्य के विचार और भावनाएं तरंगों के रूप में उसके मौलिक तत्व तक पहुंचती रहती हैं, तथा मौलिक तत्व उन सभी भावनाओं और विचारों को मनुष्य के भौतिक शरीर के प्रत्येक अणु प्रदर्शित करता रहता है। मनुष्य अपने नकारात्मक विचारों से अपने मौलिक तत्व को नकारात्मक बना देता और यही नकारात्मकता शरीर में बीमारी के रूप में प्रकट होती है। अतः हम ये कह सकते हैं कि मनुष्य के प्रत्यक्ष रूप में बीमार होने से पहले उसके शरीर का मौलिक तत्व बीमार होता है। जहाँ भय और संशय शरीर के मौलिक तत्व को पूरी तरह से पंगु बना देते हैं वहीँ जीवन के प्रति सकारात्मक विचार उसे मुक्त कर मनुष्य को अच्छा स्वास्थय प्रदान करते हैं। | चाहे मनुष्य शरीर के मौलिक तत्व की उपस्थिति को जाने या न जाने; माने या न माने, मौलिक तत्व सदैव मनुष्य की सेवा में लगा रहता है, वह मनुष्य की इच्छानुसार कार्य करता रहता है। मनुष्य के विचार और भावनाएं तरंगों के रूप में उसके मौलिक तत्व तक पहुंचती रहती हैं, तथा मौलिक तत्व उन सभी भावनाओं और विचारों को मनुष्य के भौतिक शरीर के प्रत्येक अणु प्रदर्शित करता रहता है। मनुष्य अपने नकारात्मक विचारों से अपने मौलिक तत्व को नकारात्मक बना देता और यही नकारात्मकता शरीर में बीमारी के रूप में प्रकट होती है। अतः हम ये कह सकते हैं कि मनुष्य के प्रत्यक्ष रूप में बीमार होने से पहले उसके शरीर का मौलिक तत्व बीमार होता है। जहाँ भय और संशय शरीर के मौलिक तत्व को पूरी तरह से पंगु बना देते हैं वहीँ जीवन के प्रति सकारात्मक विचार उसे मुक्त कर मनुष्य को अच्छा स्वास्थय प्रदान करते हैं। | ||
जिस प्रकार हवा के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/sylph|स्लिफ्स]](slyphs) अग्नि के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/salamander|सालामेंडर्स]](Salamanders) पृथ्वी के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/gnome|नोमस]](Gnomes) और जल के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/undine|अनडाइंस]](Undines) इस ग्रह के प्रदूषण से संक्रमित हो जाते हैं उसी प्रकार मानवता की [[Special:MyLanguage/mass consciousness|सामूहिक चेतना]] | जिस प्रकार हवा के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/sylph|स्लिफ्स]] (slyphs), अग्नि के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/salamander|सालामेंडर्स]] (Salamanders), पृथ्वी के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/gnome|नोमस]] (Gnomes) और जल के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/undine|अनडाइंस]] (Undines) इस ग्रह के प्रदूषण से संक्रमित हो जाते हैं उसी प्रकार मानवता की [[Special:MyLanguage/mass consciousness|सामूहिक चेतना]] से इंसान के शरीर के मौलिक तत्व कमज़ोर हो जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति नकारात्मकता में जीता है तो उसके शरीर का मौलिक तत्व इस नकारात्मकता से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता। अतः अस्वस्थ शरीर व्यक्ति के दूषित [[Special:MyLanguage/aura|आभामंडल]] तथा ईश्वर से उसकी दूरी की ओर इशारा करता है। अपनी आत्मिक चेतना से हमें सभी प्रकार की नकारात्मकता को स्वयं से दूर करना पड़ता है ताकि शरीर के मौलिक तत्व स्वतंत्रता से अपना काम कर पाएं। रोकथाम ही सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित इलाज है इसलिए मनुष्य को चाहिए की वह प्रतिदिन अपनी आत्मिक चेतना का आह्वाहन करे ताकि उसके शरीर का मौलिक तत्व बाह्य अतिक्रमण से सुरक्षित रहे। | ||
The source of the energy the body elemental uses in servicing the physical body is man’s own [[Threefold flame|heart flame]] and the light emanations of the [[chakra]]s. If these centers, which are for the distribution of energy from the heart to the [[four lower bodies]], are covered with astral effluvia, the body elemental is hindered in his attempts to bring forth perfection on the physical plane. The more light the individual has lowered into the forcefield of his being, the more light the body elemental has to work with as he tends the flame upon the altar of the body temple. | The source of the energy the body elemental uses in servicing the physical body is man’s own [[Threefold flame|heart flame]] and the light emanations of the [[chakra]]s. If these centers, which are for the distribution of energy from the heart to the [[four lower bodies]], are covered with astral effluvia, the body elemental is hindered in his attempts to bring forth perfection on the physical plane. The more light the individual has lowered into the forcefield of his being, the more light the body elemental has to work with as he tends the flame upon the altar of the body temple. | ||
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