29,556
edits
PeterDuffy (talk | contribs) No edit summary |
PeterDuffy (talk | contribs) No edit summary |
||
| Line 32: | Line 32: | ||
[[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] ने कहा है: | [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] ने कहा है: | ||
मैं संत जरमेन हूँ, मैं [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] का दूत हूँ और [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुम्भ युग]] तक रहूँगा। मैं इस युग का अवतार हूँ, और चैतन्य लोगों को रूपांतरण और पवित्र आत्मा की पवित्र अग्नि के मार्ग की दीक्षा देता रहूँगा। यही दीक्षा पृथ्वी पर ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तन लाएगी जो इस ग्रह के प्रारंभ होने से लेकर अब तक के सबसे बड़े परिवर्तन कहलायेंगे।<ref>संत जरमेन, “द डेलिवरेंस ऑफ़ द पीपल बाय विज़डम फ्लेम एंड द सोर्ड,” {{POWref|24|59|, मार्च १९८१}}</ref></blockquote> | <blockquote>मैं संत जरमेन हूँ, मैं [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] का दूत हूँ और [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुम्भ युग]] तक रहूँगा। मैं इस युग का अवतार हूँ, और चैतन्य लोगों को रूपांतरण और पवित्र आत्मा की पवित्र अग्नि के मार्ग की दीक्षा देता रहूँगा। यही दीक्षा पृथ्वी पर ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तन लाएगी जो इस ग्रह के प्रारंभ होने से लेकर अब तक के सबसे बड़े परिवर्तन कहलायेंगे।<ref>संत जरमेन, “द डेलिवरेंस ऑफ़ द पीपल बाय विज़डम फ्लेम एंड द सोर्ड,” {{POWref|24|59|, मार्च १९८१}}</ref></blockquote> | ||
<span id="Sources"></span> | <span id="Sources"></span> | ||