10,793
edits
JaspalSoni (talk | contribs) No edit summary |
JaspalSoni (talk | contribs) No edit summary |
||
| Line 15: | Line 15: | ||
<blockquote> | <blockquote> | ||
... मेरे पास प्रत्येक जीवनधारा के दो दस्तावेज़ हैं। पवित्र अग्नि से सम्मोहित एक दस्तावेज़ व्यक्ति के संपूर्ण जीवन स्वरुप को दर्शाता है। यह अटल औरअपरिवर्तनीय है, कभी नहीं बदलता इसलिए इसे स्थायी दस्तावेज़ कहते हैं। यह आपके लिए जीवन का नियम है। दूसरा दस्तावेज़ थोड़ा छोटा होता है और इसे स्थायी दस्तावेज़ के ऊपर रखा जाता है। यह काफी पतला और कुछ हद तक प्लास्टिक जैसा होता है। इस पर आपका संपूर्ण ऐच्छिक रिकॉर्ड दर्ज़ है - | ... मेरे पास प्रत्येक जीवनधारा के दो दस्तावेज़ हैं। पवित्र अग्नि से सम्मोहित एक दस्तावेज़ व्यक्ति के संपूर्ण जीवन स्वरुप को दर्शाता है। यह अटल औरअपरिवर्तनीय है, कभी नहीं बदलता इसलिए इसे स्थायी दस्तावेज़ कहते हैं। यह आपके लिए जीवन का नियम है। दूसरा दस्तावेज़ थोड़ा छोटा होता है और इसे स्थायी दस्तावेज़ के ऊपर रखा जाता है। यह काफी पतला और कुछ हद तक प्लास्टिक जैसा होता है। इस पर आपका संपूर्ण ऐच्छिक रिकॉर्ड दर्ज़ है - पहली बार जब आप इस पृथ्वी पर अपनी व्यक्तिगत चेतना में आए थे - आपके अस्तित्व का हर निशान, आपके मस्तिष्क में उठने वाला हर विचार इसमें दर्ज़ है। | ||
मैं इन सूचीपत्रों को तब ही देखता हूँ जब मुझे कार्मिक बोर्ड के सदस्य कहते हैं। ऐसा तब होता है जब किसी जीवनधारा के कर्मों का बोझ को कम करने के लिए उसका मूल्याङ्कन करना होता है। मूल्याङ्कन के तुरंत बाद मैं वायलेट लौ का प्रयोग कर अपनी चेतना से उस जीवनधारा के विषय प्राप्त हुई हर जानकारी बात को मिटा देता हूँ।<ref>Ibid.</ref> | मैं इन सूचीपत्रों को तब ही देखता हूँ जब मुझे कार्मिक बोर्ड के सदस्य कहते हैं। ऐसा तब होता है जब किसी जीवनधारा के कर्मों का बोझ को कम करने के लिए उसका मूल्याङ्कन करना होता है। मूल्याङ्कन के तुरंत बाद मैं वायलेट लौ का प्रयोग कर अपनी चेतना से उस जीवनधारा के विषय प्राप्त हुई हर जानकारी बात को मिटा देता हूँ।<ref>Ibid.</ref> | ||
edits