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मैं इन सूचीपत्रों को तब ही देखता हूँ जब मुझे कार्मिक समिति के सदस्य कहते हैं। ऐसा तब होता है जब किसी जीवनधारा का मूल्यांकन उसे अवसर प्रदान करके कर्मों के बोझ को अस्थायी रूप से कम करना होता है। मूल्यांकन के तुरंत बाद मैं वायलेट लौ का प्रयोग कर अपनी चेतना से उस जीवनधारा के विषय | मैं इन सूचीपत्रों को तब ही देखता हूँ जब मुझे कार्मिक समिति के सदस्य कहते हैं। ऐसा तब होता है जब किसी जीवनधारा का मूल्यांकन उसे अवसर प्रदान करके कर्मों के बोझ को अस्थायी रूप से कम करना होता है। मूल्यांकन के तुरंत बाद मैं वायलेट लौ का प्रयोग कर अपनी चेतना से उस जीवनधारा के विषय में सूची पर लिखी हुई हर जानकारी को मिटा देता हूँ।<ref>Ibid.</ref> | ||
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