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पायथागोरस एक परदे के पीछे से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप (form) है और सार (essence) भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति (Euclid’s geometry) के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय विचारों (astronomical ideas) पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस (Copernicus) की परिकल्पनाएँ सामने आईं। पायथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगभग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ कर तीन सौ लोगों की समिति (Council of Three Hundred) के द्वारा पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस समिति ने सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के मार्ग दर्शन से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को बहुत प्रभावित किया। | पायथागोरस एक परदे के पीछे से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप (form) है और सार (essence) भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति (Euclid’s geometry) के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय विचारों (astronomical ideas) पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस (Copernicus) की परिकल्पनाएँ सामने आईं। पायथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगभग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ कर तीन सौ लोगों की समिति (Council of Three Hundred) के द्वारा पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस समिति ने सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के मार्ग दर्शन से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को बहुत प्रभावित किया। | ||
पायथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। | पायथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वह नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पायथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पायथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, "मास्टर" (पायथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है। | ||
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