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[[File:LemuriaMapChurchward.jpeg|thumb|जेम्स चर्चवर्ड (१९२७) [James Churchward (1927)] की पुस्तक ''द लॉस्ट कॉन्टिनेंट ऑफ म्यू'' (The Lost Continent of Mu) से लिया गया लेमूरिया का मानचित्र। चर्चवर्ड (Churchward) ने यह मानचित्र प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने के बाद बनाया था और इसमें लेमूरिया महाद्वीप को उसी रूप में दिखाया गया है जैसा वह अपने अंतिम विनाश से पहले दिखता था।]] | [[File:LemuriaMapChurchward.jpeg|thumb|जेम्स चर्चवर्ड (१९२७) [James Churchward (1927)] की पुस्तक ''द लॉस्ट कॉन्टिनेंट ऑफ म्यू'' (The Lost Continent of Mu) से लिया गया लेमूरिया का मानचित्र। चर्चवर्ड (Churchward) ने यह मानचित्र प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने के बाद बनाया था और इसमें लेमूरिया महाद्वीप को उसी रूप में दिखाया गया है जैसा वह अपने अंतिम विनाश से पहले दिखता था।]] | ||
'' | ''मू'', या ''लेमूरिया'',(Mu or Lemuria) प्रशांत महासागर का एक खोया हुआ महाद्वीप था, जो पुरातत्ववेत्ता (archaeologist) और ''द लॉस्ट कॉन्टिनेंट ऑफ मू'' (The Lost Continent of Mu) के लेखक जेम्स चर्चवर्ड (James Churchward) के अनुसार [[Special:MyLanguage/Hawaii|हवाई]] (Hawaii) के उत्तर से लेकर ईस्टर द्वीप (Easter Island) और फिजी (Fijis) के दक्षिण में तीन हज़ार मील तक फैला हुआ था। भूमि के तीन भागों से बना यह महाद्वीप पूर्व से पश्चिम तक करीब पांच हजार मील में फैला था। | ||
चर्चवर्ड (Churchward) द्वारा लिखा गया प्राचीन मातृभूमि का इतिहास उन पवित्र पट्टिकाओं (sacred tablets) पर अंकित अभिलेखों पर आधारित है जो उन्हें भारत से मिले थे। भारत के एक मंदिर के पुजारी ने उन्हें इन अभिलेखों का अर्थ समझाया। पचास वर्षों के अपने शोध (research) के दौरान उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया, युकाटन (Yucatan), मध्य-अमेरिका, प्रशांत द्वीप समूह, मैक्सिको, उत्तरी अमेरिका, प्राचीन मिस्र और अन्य सभ्यताओं में पाए गए लेखों, शिलालेखों (inscriptions) और किंवदंतियों (legends) का अध्ययन किया तथा इस ज्ञान की पुष्टि की। उनके अनुसार म्यू लगभग बारह हजार साल पहले तब नष्ट हो गया जब इस महाद्वीप को बनाए रखने वाले वायु के कक्ष नष्ट हो गए। | चर्चवर्ड (Churchward) द्वारा लिखा गया प्राचीन मातृभूमि का इतिहास उन पवित्र पट्टिकाओं (sacred tablets) पर अंकित अभिलेखों पर आधारित है जो उन्हें भारत से मिले थे। भारत के एक मंदिर के पुजारी ने उन्हें इन अभिलेखों का अर्थ समझाया। पचास वर्षों के अपने शोध (research) के दौरान उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया, युकाटन (Yucatan), मध्य-अमेरिका, प्रशांत द्वीप समूह, मैक्सिको, उत्तरी अमेरिका, प्राचीन मिस्र और अन्य सभ्यताओं में पाए गए लेखों, शिलालेखों (inscriptions) और किंवदंतियों (legends) का अध्ययन किया तथा इस ज्ञान की पुष्टि की। उनके अनुसार म्यू लगभग बारह हजार साल पहले तब नष्ट हो गया जब इस महाद्वीप को बनाए रखने वाले वायु के कक्ष नष्ट हो गए। | ||
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