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Translations:Lemuria/9/hi: Difference between revisions

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मू (Mu) के मुख्य मंदिर में [[Special:MyLanguage/Divine Mother|दिव्य माँ]] की लौ को दिव्य पिता की लौ (जो सूर्य की सुनहरी नगरी में केंद्रित है) के जोड़ीदार के रूप में स्थापित किया गया था। शहर के पुजारियों और पुजारिनों ने पवित्र शब्दों और मन्त्रों द्वारा ईश्वर का आह्वान करने के प्राचीन अनुष्ठानों (rituals) द्वारा इस ग्रह पर ब्रह्मांडीय शक्तियों का संतुलन बनाये रखा। मू की विस्तृत की कई कालोनी (colonies) में इस तरह की पवित्र चेतना के कई मंदिर स्थापित किये गए। इन मंदिरो की वजह से पृथ्वी और सूर्य के बीच प्रकाश का वृत्तखण्ड (arc of light) बन गया जो पृथ्वी और सूर्य की लौ से बंधा था। यह वृत्तखंड ईश्वर की विशुद्ध ऊर्जा को पृथ्वी पर पहुंचाने का कार्य करता था जिससे वस्तुएं भौतिक रूप ग्रहण करती थी।
मू (Mu) के मुख्य मंदिर में [[Special:MyLanguage/Divine Mother|दिव्य माँ]] की लौ को दिव्य पिता की लौ (जो सूर्य की सुनहरी नगरी में केंद्रित है) के जोड़ीदार के रूप में स्थापित किया गया था। शहर के पुजारियों और पुजारिनों ने पवित्र शब्दों और मन्त्रों द्वारा ईश्वर का आह्वान करने के प्राचीन अनुष्ठानों (rituals) द्वारा इस ग्रह पर ब्रह्मांडीय शक्तियों का संतुलन बनाये रखा। मू की विस्तृत की कई कालोनी (colonies) में इस तरह की पवित्र चेतना के कई मंदिर स्थापित किये गए। इन मंदिरो की वजह से पृथ्वी और सूर्य के बीच प्रकाश का वृत्तखण्ड (arc of light) बन गया जो पृथ्वी और सूर्य की लौ से बंधा था। यह वृत्तखंड ईश्वर की अध्यात्मिक ऊर्जा (Logos) को पृथ्वी पर पहुंचाने का कार्य करता था जिससे वस्तुएं भौतिक रूप ग्रहण करती थी।
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