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वर्तमान समय में [[Special:MyLanguage/Gautama Buddha|गौतम बुद्ध]] विश्व के स्वामी का पदभार संभाल रहे हैं। Rev. ११:४ में इन्हें "पृथ्वी के भगवान" (“God of the Earth” in Rev. 11:4) के रूप में संदर्भित किया गया है। गौतम बुद्ध से पहले [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] ने हज़ारों सालों तक इस पद पर कार्य किया था। सनत कुमार आध्यात्मिक पदक्रम में सर्वोच्च हैं जबकि गौतम बुद्ध सबसे अधिक विनम्र दिव्यगुरु हैं। | वर्तमान समय में [[Special:MyLanguage/Gautama Buddha|गौतम बुद्ध]] विश्व के स्वामी का पदभार संभाल रहे हैं। Rev. ११:४ में इन्हें "पृथ्वी के भगवान" (“God of the Earth” in Rev. 11:4) के रूप में संदर्भित किया गया है। गौतम बुद्ध से पहले [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] ने हज़ारों सालों तक इस पद पर कार्य किया था। सनत कुमार आध्यात्मिक पदक्रम में सर्वोच्च हैं जबकि गौतम बुद्ध सबसे अधिक विनम्र दिव्यगुरु हैं। | ||
आंतरिक स्तर पर | आंतरिक स्तर पर वह उन जीवों की [[Special:MyLanguage/threefold flame|त्रिज्योति लौ]] को बनाए रखते हैं जिनका अपने [[Special:MyLanguage/I AM Presence|ईश्वरीय स्वरुप]] (I AM Presence) के साथ संपर्क समाप्त हो गया है; जिनके नकारात्मक [[Special:MyLanguage/karma|कर्म]] इतने अधिक हैं कि वे पृथ्वी पर अपने भौतिक स्वरुप को बनाए रखने के लिए ईश्वर से पर्याप्त प्रकाश प्राप्त करने में असमर्थ हैं। गौतम बुद्ध प्रकाश की एक बारीक़ (filigree) प्रकाश की धारा के माध्यम से अपने हृदय को भगवान के सभी बच्चों के हृदयों से जोड़ते हैं। ऐसा करके वह उन सभी जीवों की टिमटिमाती त्रिज्योति लौ का पोषण करते हैं - वह त्रिज्योति लौ जिसे वास्तव में उनकी अपनी आत्मिक चेतना से पोषित हो कर प्रेम, ज्ञान और शक्ति से युक्त अधिक मात्रा में प्रज्वलित होना चाहिए। | ||
<span id="Sanat_Kumara,_the_previous_Lord_of_the_World"></span> | <span id="Sanat_Kumara,_the_previous_Lord_of_the_World"></span> | ||
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