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१९७४ में महा चौहान ने कहा था: | १९७४ (1974) में महा चौहान ने कहा था: | ||
कार्मिक समिति ने कहा है कि इस समय पृथ्वीजीवों के विकास में अब वह क्षण आ गया है जब ब्रह्मांडीय घंटा बज चूका है। इस समय समस्त मानव जाति को चाहिए कि वे अपने मनमंदिर को ईश्वर का निवास स्थान बनाने के लिए तैयार करें। बहुत ज़रूरी है कि कम से कम कुछ मनुष्य तो ईश्वर की आत्मा को ग्रहण करने के लिए पूर्णतया शुद्ध हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पृथ्वी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। क्योंकि जब तक ईश्वर की पवित्र ऊर्जा पुरुषों और स्त्रियों के जीवन में नहीं उतरती पृथ्वी पर जीवन का संतुलन नहीं हो सकता। रात के बारह बजे, जब वर्ष १९७५ प्रारम्भ होगा, ठीक उस समय ईश्वर पृथ्वी पर अपनी ऊर्जा का प्रसारण करेंगे। <ref>द महा चौहान, “अ तबेरनाक्ले ऑफ़ विटनेस फ़ोर द होली स्पिरिट इन द फाइनल क्वार्टर ऑफ़ द सेंचुरी,” १ जुलाई, १९७४.</ref></blockquote> | कार्मिक समिति ने कहा है कि इस समय पृथ्वीजीवों के विकास में अब वह क्षण आ गया है जब ब्रह्मांडीय घंटा बज चूका है। इस समय समस्त मानव जाति को चाहिए कि वे अपने मनमंदिर को ईश्वर का निवास स्थान बनाने के लिए तैयार करें। बहुत ज़रूरी है कि कम से कम कुछ मनुष्य तो ईश्वर की आत्मा को ग्रहण करने के लिए पूर्णतया शुद्ध हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पृथ्वी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। क्योंकि जब तक ईश्वर की पवित्र ऊर्जा पुरुषों और स्त्रियों के जीवन में नहीं उतरती पृथ्वी पर जीवन का संतुलन नहीं हो सकता। रात के बारह बजे, जब वर्ष १९७५ प्रारम्भ होगा, ठीक उस समय ईश्वर पृथ्वी पर अपनी ऊर्जा का प्रसारण करेंगे। <ref>द महा चौहान, “अ तबेरनाक्ले ऑफ़ विटनेस फ़ोर द होली स्पिरिट इन द फाइनल क्वार्टर ऑफ़ द सेंचुरी,” १ जुलाई, १९७४.</ref></blockquote> | ||
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