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Sanat Kumara and Lady Master Venus/hi: Difference between revisions

Created page with "ब्रह्मांडीय परिषद ने पृथ्वी और उसके सभी निवासियों को नष्ट का फरमान जारी किया था क्योंकि पृथ्वीवासी ईश्वर का मार्ग त्याग चुके थे, उन्होंने अपने हृदय में स्थित त्रिदेव ज्योत - जोकि त्..."
(Created page with "आप सब मुझे सनत कुमार के नाम से जानते हैं - वह व्यक्ति जो एक सौ चौवालीस की परिषद - जिसे ब्रह्मांडीय परिषद भी कहते हैं - के समक्ष खड़ा हुआ था। आप मुझे जानते हैं क्योंकि आप मेरी इस बात के साक...")
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आप सब मुझे सनत कुमार के नाम से जानते हैं - वह व्यक्ति जो एक सौ चौवालीस की परिषद - जिसे ब्रह्मांडीय परिषद भी कहते हैं - के समक्ष खड़ा हुआ था। आप मुझे जानते हैं क्योंकि आप मेरी इस बात के साक्षी थे। आपके सामने ही मैंने पृथ्वी के जीवों के लिए प्रार्थना की थी - वो पृथ्वीवासी जो अपनी वास्तविक स्थिति को भूल गए थे और अपने जीवित गुरु से अलग हो गए थे। आप मुझे उस व्यक्ति के रूप में जानते हैं जो पृथ्वी पर सात स्तरों — अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी - में विकसित हो रहे जीवों में [[Special:MyLanguage/threefold flame|त्रिदेव ज्योत]] को मूर्त रूप देने के लिए स्वेच्छा से आया था।
आप सब मुझे सनत कुमार के नाम से जानते हैं - वह व्यक्ति जो एक सौ चौवालीस की परिषद - जिसे ब्रह्मांडीय परिषद भी कहते हैं - के समक्ष खड़ा हुआ था। आप मुझे जानते हैं क्योंकि आप मेरी इस बात के साक्षी थे। आपके सामने ही मैंने पृथ्वी के जीवों के लिए प्रार्थना की थी - वो पृथ्वीवासी जो अपनी वास्तविक स्थिति को भूल गए थे और अपने जीवित गुरु से अलग हो गए थे। आप मुझे उस व्यक्ति के रूप में जानते हैं जो पृथ्वी पर सात स्तरों — अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी - में विकसित हो रहे जीवों में [[Special:MyLanguage/threefold flame|त्रिदेव ज्योत]] को मूर्त रूप देने के लिए स्वेच्छा से आया था।


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ब्रह्मांडीय परिषद ने पृथ्वी और उसके सभी निवासियों को नष्ट का फरमान जारी किया था क्योंकि पृथ्वीवासी ईश्वर का मार्ग त्याग चुके थे, उन्होंने अपने हृदय में स्थित त्रिदेव ज्योत - जोकि त्रिमूर्ति (ब्रह्मा विष्णु महेश) का रूप है - की उपासना करना बंद कर दिया था। मनुष्य ईश्वर के रास्ते से भटक गए थे और केवल बाह्य अभिव्यक्ति पर ही ज़ोर देते थे। अज्ञानी होने के कारण मनुष्यों ने जानबूझकर ईश्वर के साथ अपने आंतरिक संबंध को त्याग दिया था।
The Cosmic Council had decreed the dissolution of earth and her evolutions because the souls of her children no longer worshiped the Trinity in the threefold flame of life burning upon the altar of the heart. They had become the sheep gone astray. Their attention fixed upon the outer manifestation, they had willfully, ignorantly abandoned the inner walk with God....
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