7,169
edits
(Created page with "इंसान को स्वस्थ रखने के लिये मौलिक तत्व उसके ह्रदय में स्थित त्रिदेव ज्योत और शरीर के सातों चक्रों से प्रवहित होते हुए प्रकाश का इस्तेमाल करता है। ये चक्र ह...") Tags: Mobile edit Mobile web edit |
No edit summary |
||
| Line 24: | Line 24: | ||
जिस प्रकार हवा के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/sylph|सिल्फ्स]] (slyphs), अग्नि के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/salamander|सैलामैंडर]] (Salamanders), पृथ्वी के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/gnome|नोम्स]] (Gnomes) और जल के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/undine|अनडाइंस]] (Undines) इस ग्रह के प्रदूषण से संक्रमित हो जाते हैं उसी प्रकार मानवता की [[Special:MyLanguage/mass consciousness|सामूहिक चेतना]] से इंसान के शरीर के मौलिक तत्व कमज़ोर हो जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति नकारात्मकता में जीता है तो उसके शरीर का मौलिक तत्व इस नकारात्मकता से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता। अतः अस्वस्थ शरीर व्यक्ति के दूषित [[Special:MyLanguage/aura|आभामंडल]] तथा ईश्वर से उसकी दूरी की ओर इशारा करता है। अपनी आत्मिक चेतना से हमें सभी प्रकार की नकारात्मकता को स्वयं से दूर करना पड़ता है ताकि शरीर के मौलिक तत्व स्वतंत्रता से अपना काम कर पाएं। रोकथाम ही सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित इलाज है इसलिए मनुष्य को चाहिए की वह प्रतिदिन अपनी आत्मिक चेतना का आह्वाहन करे ताकि उसके शरीर का मौलिक तत्व बाह्य अतिक्रमण से सुरक्षित रहे। | जिस प्रकार हवा के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/sylph|सिल्फ्स]] (slyphs), अग्नि के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/salamander|सैलामैंडर]] (Salamanders), पृथ्वी के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/gnome|नोम्स]] (Gnomes) और जल के मौलिक तत्व [[Special:MyLanguage/undine|अनडाइंस]] (Undines) इस ग्रह के प्रदूषण से संक्रमित हो जाते हैं उसी प्रकार मानवता की [[Special:MyLanguage/mass consciousness|सामूहिक चेतना]] से इंसान के शरीर के मौलिक तत्व कमज़ोर हो जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति नकारात्मकता में जीता है तो उसके शरीर का मौलिक तत्व इस नकारात्मकता से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता। अतः अस्वस्थ शरीर व्यक्ति के दूषित [[Special:MyLanguage/aura|आभामंडल]] तथा ईश्वर से उसकी दूरी की ओर इशारा करता है। अपनी आत्मिक चेतना से हमें सभी प्रकार की नकारात्मकता को स्वयं से दूर करना पड़ता है ताकि शरीर के मौलिक तत्व स्वतंत्रता से अपना काम कर पाएं। रोकथाम ही सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित इलाज है इसलिए मनुष्य को चाहिए की वह प्रतिदिन अपनी आत्मिक चेतना का आह्वाहन करे ताकि उसके शरीर का मौलिक तत्व बाह्य अतिक्रमण से सुरक्षित रहे। | ||
इंसान को स्वस्थ रखने के लिये मौलिक तत्व उसके ह्रदय में स्थित [[Special:MyLanguage/ | इंसान को स्वस्थ रखने के लिये मौलिक तत्व उसके ह्रदय में स्थित [[Special:MyLanguage/Threefold flame|त्रिदेव ज्योत]] और शरीर के सातों [[Special:MyLanguage/chakra|चक्रों]] से प्रवहित होते हुए प्रकाश का इस्तेमाल करता है। ये चक्र ह्रदय की ऊर्जा को [[Special:MyLanguage/four lower bodies|चारों निचले शरीरों]] में वितरित करते हैं, परन्तु अगर ये चक्र सूक्ष्म स्तर के प्रदुषण से प्रभावित होते हैं तो मौलिक तत्व भौतिक स्तर पर अपना काम करने में बाधित होता है। इंसान जितना अधिक प्रकाश अपने शारीरिक प्रभावक्षेत्र में संचारित करता है, मौलिक तत्व उतना ही प्रकाश उसकी सेवा में अर्पित करता है। | ||
You are the master of your body elemental. As you give him positive input instead of those complaining negatives, you will be much happier, more healthy and more holy—and so will your body elemental. And, of course, body elementals cannot do the best job, even though they would like to, when you don’t give them the best food and exercise, spiritual teaching and practices. | You are the master of your body elemental. As you give him positive input instead of those complaining negatives, you will be much happier, more healthy and more holy—and so will your body elemental. And, of course, body elementals cannot do the best job, even though they would like to, when you don’t give them the best food and exercise, spiritual teaching and practices. | ||
edits