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(Created page with "एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था...") |
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एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि "यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।"<ref>डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.</ref> हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२ की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी। | एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि "यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।"<ref>डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.</ref> हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२ की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी। | ||
कोलंबस का मानना था कि ईश्वर ने उन्हें "नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। "इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,"<ref>क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.</ref> उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, "आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।" कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”<ref>''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”</ref> | |||
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