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Saint Germain/hi: Difference between revisions

Created page with "उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक "लास प्रोफिसियास (..."
(Created page with "कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें "नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। "...")
(Created page with "उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक "लास प्रोफिसियास (...")
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कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें "नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। "इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,"<ref>क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.</ref> उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, "आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।" कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”<ref>''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”</ref>
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें "नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। "इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,"<ref>क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.</ref> उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, "आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।" कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”<ref>''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”</ref>


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उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक "लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )", में लिखा। "द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम" में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में "एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका" में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि "कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।"  
He was certain that he had been divinely selected for his mission. He studied the biblical prophets, writing passages relating to his mission in a book of his own making entitled ''Las Proficias'', or ''The Prophecies''—in its complete form, ''The Book of Prophecies concerning the Discovery of the Indies and the Recovery of Jerusalem''. Although the point is seldom stressed, it is a fact so rooted in history that even ''Encyclopaedia Britannica'' says unequivocally that “Columbus discovered America by prophecy rather than by astronomy.”
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[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|<span lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">Francis Bacon, Viscount St Alban, by unknown artist</span>]]
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|<span lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">Francis Bacon, Viscount St Alban, by unknown artist</span>]]
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