शैतान
[ग्रीक, हिब्रू "विरोधी"] पथभ्रष्ट महादेवदूत ल्यूसिफर का एक अफसर और उसके पदक्रम का एक महत्वपूर्ण सदस्य, गलती से जिसे मुख्य धोखेबाज समझा जाता था। पर यह भी सही है कि अपने पतन से पहले शैतान ने महादेवदूत का पद प्राप्त नहीं किया था। इसी कारण पथभ्रष्ट देवदूतों की पदक्रम में न तो वह और न ही कोई अन्य कभी भी ल्यूसिफर से ऊपर था।


False Hierarchy
लूसिफ़र “एक शैतानी ताकत” था, और उसके अधीनस्थ सभी पथभ्रष्ट देवदूतों को शैतान कहा जाता है। आज भी लूसिफ़र के वंशज अन्य सभी पथभ्रष्ट शक्तियों व् काली ताकतों में सबसे ऊपर माने जाते हैं। सभी बुरी शक्तियां और वो सभी लोग जिन्होंने पाप का रास्ता अपनाया उन्हें जातिवाचक शब्द “शैतान” से संबोधित किया जाता है।
शास्त्रों में लूसिफर, शैतान और उनके सभी सहायकों को विरोधी, प्रलोभक, चेतना का शत्रु, कामुक मन अर्थात् दहलीज़ पर रहने वाला दुष्ट, सर्प, क्रूर व्यक्ति, खूंखार व्यक्ति आदि के रूप में संदर्भित किया गया है।

शैतान पर अंतिम निर्णय
२७ जनवरी, १९८२ को शैतान को पवित्र अग्नि के न्यायालय में भेज दिया गयाजहाँ उस पर अंतिम निर्णय लिया गया, और उसे दूसरी मृत्यु प्राप्त हुई। ईसा मसीह ने इस महत्वपूर्ण घटना की घोषणा की थी:
मैं आपको यह सूचित कर रहा हूँ कि जिस व्यक्ति को इतने समय से आप शैतान के रूप में जानते हैं, उसे आज पवित्र अग्नि के दरबार में भेजने का निर्णय ले लिया गया है
हे प्रिय बच्चो, आपमें से कुछ, जो हमारे शिष्य हैं, वो जानते हैं कि कई वर्ष पूर्व जब हमारे दूतों ने पृथ्वी पर जन्म लिया था तो उनके कहने पर शैतान की शक्ति कम कर दी गई थी। [1] फिर दूतों और प्रकाश वाहकों के नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए परम पिता परमात्मा ने मुझे उस पथभ्रष्ट दूत का न्याय करने का आह्वान दिया।
अतः आपको यह ज्ञात होना चाहिए कि शैतान को उस न्यायालय में वापस भेज दिया गया जहाँ सनत कुमार और चौबीस वरिष्ठों ने उसका न्याय किया, जो अंतिम निर्णय था। अब स्वर्ग और पृथ्वी के सभी निवासी आनन्द से रहें क्योंकि शैतान की शक्ति अब बंधी हुई है, और उस का न्याय हो चुका है। अब वह पृथ्वी या किसी अन्य लोक के निवासियों के बीच जाकर उन्हें ईश्वर के विरुद्ध भड़कायेगा नहीं!
यह दूसरी घटना थी जब हमारे दो गवाहों द्वारा पथभ्रष्ट दूतों का अंतिम न्याय हुआ था। आप लूसिफ़र के न्याय, बंधन और दूसरी मृत्यु से अवगत हैं।[2]
अब आप शैतान के बंधन, न्याय और दूसरी मृत्यु से अवगत हो जाइये। समझ लीजिये कि गॉड स्टार (वह स्थान जहाँ से ईश्वर न्याय करते हैं) के न्यायालय में मुकदमे के बाद ही दूसरी मृत्यु का समय तय होता है। हमने न केवल शैतान के प्रभाव के बारे में सुना, और उसकी गवाही दी है, बल्कि उसकी संतानों - जिन्हें शैतान कहा जाता है और जिन्होनें इस आकाशगंगा के कोने कोने में अपना अपना डेरा जमा रखा है - के प्रभाव के बारे में भी सुना है।
आप कल्पना भी नहीं कर सकते शैतान कि शैतान का वंश कितना फैल चुका है। इसी कारण से लाखों वर्षों से सलाखों के पीछे रहने पर भी उस पथभ्रष्ट व्यक्ति ने शैतानों की उस जाति का केंद्र बिंदु बना दिया है जो अतीत में ईश्वरीय जाति के विरुद्ध खड़ी हुई थी।
इसलिए जो लोग अभी पृथ्वी और अन्य ग्रहों पर जीवित हैं, वे निरंतर विघटित होते जा रहे हैं। उन्होंने ईश्वर के मूल रूप की प्रेरणा और शक्ति को खो दिया है पर मेरा हृदय आपके लिए आज ईश्वर की उस प्रेरणा और शक्ति को संभाले हुए है।
मेरे प्रिय बच्चो, यह एक ऐसी घटना है जो न सिर्फ मेरे जीवन वरन उन सभी लोगों के जीवन में आनेवाले आनंद की व्यक्तिगत शत्रु रही है जो मेरे साथ हैं। मुझे इस घटना की काफी समय से प्रतीक्षा थी; मैं जानता हूँ कि इसी घटना के फलस्वरूप आप सब की त्रिदेव ज्योत मेरी त्रिदेव ज्योत के संपर्क में आएगी तथा एक नई शक्ति, ज्ञान, प्रेम, "चिकित्सा", रूपांतरण का आविर्भाव होगा।
यद्यपि मूल शैतान आज पृथ्वी पर विद्यमान नहीं पर उसके वंशज यहां विचरण कर रहे हैं। और यह ईश्वर के प्रति समर्पित पृथ्वीवासियों के लिए एक संकेत है कि उनके अपने अंतिम समय में उनके अंतर्मन में क्रोध और प्रलाप होगा और यह अंतिम न्याय में भी प्रकट होगा। शैतान के सभी वंशजों के साथ आतंरिक स्तर पर न्याय होगा, पूर्व में भी ऐसा ही हुआ है। भौतिक स्तर में इन जीवन तरंगों के अवशेष अभी भी विद्यमान हैं।
मैं आपके पास इसीलिए आया हूँ ताकि आप ये समझ सकें कि ये ईश्वर-विरोधी शक्तियां किस प्रकार एकत्र हो रही हैं, और किस प्रकार जीवन के अंतिम क्षणों में, भौतिक स्तर से विलीन होने के ठीक पहले ये शकितयाँ उच्च चेतना वाले लोगों के विरुद्ध आंदोलन करेंगी और उन्हें ईश्वर के रास्ते से विमुख करना चाहेंगी। [3] अतः आप यह बात अच्छी तरह समझ लीजिये कि आनंद के इसी क्षण में, न्याय का आह्वान भी पूरी शक्ति से होना चाहिए इससे स्वर्ग में होने वाली घटनाओं की पुष्टि हो सकेगी।
आप यह समझ रहे हैं न कि जब पथभ्रष्ट दूतों को स्वर्ग से पृथ्वी पर भेजा गया था, तब से ही पृथ्वी पर लूसिफ़र और शैतान की संतानों का स्त्री की संतानों के विरुद्ध युद्ध प्रारम्भ हुआ (और यह अब तक हो रहा है)। आप यह भी जानते हैं कि जब मूल कारण हटा दिया जाता है तो उसका परिणाम भी निष्फल हो जाता है। फिर भी पूर्ण सफाई करना आवश्यक है, यह भी एक महान कार्य है![4]
इसे भी देखिये
स्रोत
Mark L. Prophet and Elizabeth Clare Prophet, Saint Germain On Alchemy: Formulas for Self-Transformation
- ↑ रेव २०:२, ३. वर्ष १९६८ में महादेवदूत माइकल ने शैतान को बांध दिया।
- ↑ इसा १४:१२. २६ अप्रैल, १९७५ को लूसिफ़र को दूसरी मृत्यु की सजा सुनाई गई थी। उसके अंतिम न्याय की घोषणा अल्फा ने ५ जुलाई, १९७५ को की थी। अल्फा का लेख, “द जजमेंट: द सीलिंग ऑफ़ लीफेवावेस थ्रूआउट द गैलेक्सी,” और ६ जुलाई, १९७५ का लिखा एलिजाबेथ क्लेयर प्रॉफेट का लेख "एंटीक्राइस्ट: द ड्रैगन द बीस्ट, द फाल्स प्रोफेट, एंड द ग्रेट होर Elizabeth Clare Prophet, The Great White Brotherhood in the Culture, History and Religion of America
- ↑ Rev. १९:७; २१:९
- ↑ ईसा मसीह, “द फाइनल जजमेंट ऑफ़ सेटन,” Pearls of Wisdom, vol. २५, no. १६ १८ अप्रैल, १९८२.