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(Created page with "सर थॉमस अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित थे तथा अपने सभी कार्यों को उत्साह से करते थे। जब वहां के राजा हेनरी को सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्हो...") Tags: Mobile edit Mobile web edit |
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मोर्या को "बहुमुखी प्रतिभा वाले व् विभिन्न भूमिकायें निभाने में सक्षम" सर थॉमस मोर (१४७८-१५३५), के नाम से भी जाना जाता था। उनकी ईश्वर के प्रति गहरी आस्था थी और एक समय ऐसा भी था जब वे अपनी आजीविका के लिए किसी धार्मिक कार्य को अपनाना चाहते थे - आत्म-अनुशासन का परीक्षण करने के लिए उन्होंने चार वर्षों से अधिक समय तक असाधारण तपस्या भी की। परन्तु बाद में उन्होंने विवाह लिया - आगे चलकर उनकी पत्नी और चार बच्चे ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी और एकमात्र सुख का साधन साबित हुए। उनका घर चेल्सी में था जहाँ वे अपने पूरे परिवार - पत्नी, बच्चे और ग्यारह पोते-पोतियों - समेत रहते थे। | मोर्या को "बहुमुखी प्रतिभा वाले व् विभिन्न भूमिकायें निभाने में सक्षम" सर थॉमस मोर (१४७८-१५३५), के नाम से भी जाना जाता था। उनकी ईश्वर के प्रति गहरी आस्था थी और एक समय ऐसा भी था जब वे अपनी आजीविका के लिए किसी धार्मिक कार्य को अपनाना चाहते थे - आत्म-अनुशासन का परीक्षण करने के लिए उन्होंने चार वर्षों से अधिक समय तक असाधारण तपस्या भी की। परन्तु बाद में उन्होंने विवाह लिया - आगे चलकर उनकी पत्नी और चार बच्चे ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी और एकमात्र सुख का साधन साबित हुए। उनका घर चेल्सी में था जहाँ वे अपने पूरे परिवार - पत्नी, बच्चे और ग्यारह पोते-पोतियों - समेत रहते थे। | ||
अंततः मोर का घर, जिसे वे अक्सर "छोटा आदर्शलोक" कहते थे, शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बन गया, जिसकी तुलना इरास्मस ने "प्लेटो की अकादमी" से की थी। यह सद्भावना से पूर्ण घर था जिसमें उस समय के राजा और अनेक विद्वान लोग सलाह-मश्वरे के लिये आते थे। यहीं पर मोर | अंततः मोर का घर, जिसे वे अक्सर "छोटा आदर्शलोक" कहते थे, शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बन गया, जिसकी तुलना इरास्मस ने "प्लेटो की अकादमी" से की थी। यह सद्भावना से पूर्ण घर था जिसमें उस समय के राजा और अनेक विद्वान लोग सलाह-मश्वरे के लिये आते थे। यहीं पर मोर ने ''[[Special:MyLanguage/Utopia|यूटोपिया]]'' नामक पुस्तक लिखी थी जिसमें उन्होंने अंग्रेजी जीवन की अल्पज्ञता और अंग्रेजी कानून की बुराइयों का विनोदपूर्वक खुलासा किया है । | ||
१५२९ में सर थॉमस मोर को हेनरी अष्टम द्वारा इंग्लैंड के लॉर्ड चांसलर और ग्रेट सील के रक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी उपलब्धियां के लिए उन्हें कई बार समान्नित भी किया गया था हालांकि वे इस बात के इच्छुक नहीं थे। वह अपनी तत्परता, कार्यकुशलता और समतापूर्ण न्याय के लिए जाने जाते थे। वह गरीब और असहाय लोगों की सहायता करने के उद्देश्य से प्रतिदिन लंदन की गलियों में घूमते थे। | १५२९ में सर थॉमस मोर को हेनरी अष्टम द्वारा इंग्लैंड के लॉर्ड चांसलर और ग्रेट सील के रक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी उपलब्धियां के लिए उन्हें कई बार समान्नित भी किया गया था हालांकि वे इस बात के इच्छुक नहीं थे। वह अपनी तत्परता, कार्यकुशलता और समतापूर्ण न्याय के लिए जाने जाते थे। वह गरीब और असहाय लोगों की सहायता करने के उद्देश्य से प्रतिदिन लंदन की गलियों में घूमते थे। | ||